आश्रम
Also in English: Lodge — the English twin
सुशोभित पत्थर—कठोर, जड़,
दृष्टि भ्रमित, मन रहा अचेत।
स्थिर है जैसे नभ में बादल,
पर भीतर शून्य, न जीवन-रेख।
सब कुछ क्रम में, त्रुटि न एक,
दीवारें दृढ़, न रेत, न लेख।
न आँधी, न संदेह, न काल,
एक का राज, शेष सब शून्य हाल।
किन्तु संपूर्णता से रिक्त,
स्वयं थोपित यह दारुण लिप्त।
भय रोके, चिंता उठे,
वन के भीतर वृक्ष खोजे।
किरण प्रकट, आधार मिला,
पग-पग साधक ध्यान दिया।
क्षण को थाम, पथ को साध,
अपना ढूँढे, अपरिचित साध।
त्याग दिया वह पत्थर-गृह,
कौन गया, या कौन बसा उर?
जो स्थिर था, अब बहता है,
जड़ से जागे, मौन बने गान।